भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन-परिचय (Bhawani Prasad Mishr Ka Jivan Parichay)

भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध आधुनिक कवि थे। वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी कविता में सादगी, आत्मीयता, मानवीय संवेदना और जीवन की सहज अनुभूति का सुंदर रूप देखने को मिलता है।

जन्म

भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म 29 मार्च 1913 ई. को होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उनका पारिवारिक वातावरण सरल और संस्कारयुक्त था, जिसका प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।

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शिक्षा

उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही साहित्य में विशेष रुचि थी। आगे चलकर वे साहित्य-सेवा को ही अपना जीवन-धर्म बना लिया।

साहित्यिक जीवन

भवानी प्रसाद मिश्र का साहित्यिक जीवन साधारण जन-जीवन से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने कविता को कृत्रिमता से मुक्त कर सहज और स्वाभाविक रूप दिया। उनकी कविताओं में घर, परिवार, माँ, पिता, गाँव, प्रकृति और मानवीय रिश्तों का भावनात्मक चित्रण मिलता है।

प्रमुख कृतियाँ

भवानी प्रसाद मिश्र की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं—

  • गीत फरोश
  • बुनी हुई रस्सी
  • सतपुड़ा के जंगल
  • त्रिकाल संध्या

ये रचनाएँ आधुनिक हिन्दी कविता में विशेष स्थान रखती हैं।

भाषा

उनकी भाषा—

  • सरल
  • बोलचाल की
  • सहज और आत्मीय

है। वे कठिन शब्दों से बचते थे।

शैली

  • स्वाभाविक शैली
  • संवादात्मक शैली
  • आत्मकथात्मक शैली

उनकी शैली में बनावटीपन नहीं मिलता।

काव्य-विशेषताएँ

  • मानवीय संवेदना
  • पारिवारिक प्रेम
  • प्रकृति-प्रेम
  • सादगी और ईमानदारी

साहित्य में स्थान

भवानी प्रसाद मिश्र आधुनिक हिन्दी कविता के उन कवियों में हैं जिन्होंने कविता को आम आदमी के अनुभवों से जोड़ा। उनकी कविता आज भी पाठकों के मन को छूती है।

निधन

भवानी प्रसाद मिश्र का निधन 20 फ़रवरी 1985 ई. को हुआ

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