लोकोक्तियाँ (अर्थ और वाक्य-प्रयोग) | Lokoktiyan In Hindi

लोकोक्तियाँ वे प्रसिद्ध और प्रचलित कथन होते हैं जो लोक-जीवन के लंबे अनुभवों, ज्ञान और सच्चाइयों को संक्षेप में व्यक्त करते हैं। ये सामान्यतः छोटे वाक्य होते हैं, लेकिन इनमें गहरा अर्थ और जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षा छिपी होती है। लोकोक्तियाँ किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं बनाई जातीं, बल्कि समाज के लोगों के अनुभवों से धीरे-धीरे बनती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रचलित हो जाती हैं। इनका प्रयोग किसी बात को स्पष्ट करने, समझाने या उदाहरण देने के लिए किया जाता है। लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा अधिक प्रभावशाली, रोचक और अर्थपूर्ण बन जाती है।

लोकोक्तियाँ

  • अंधों में काना राजा — मूर्खों के बीच थोड़ा बुद्धिमान व्यक्ति श्रेष्ठ होता है।
    वाक्य-प्रयोग: उस छोटे गाँव में वह थोड़ा पढ़ा-लिखा है इसलिए अंधों में काना राजा बना हुआ है।
  • अधजल गगरी छलकत जाए — कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।
    वाक्य-प्रयोग: थोड़ा पढ़कर ही वह घमंड करने लगा, सच है अधजल गगरी छलकत जाए।
  • अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत — समय निकल जाने पर पछताने से लाभ नहीं।
    वाक्य-प्रयोग: परीक्षा के बाद पढ़ने से क्या फायदा, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
  • अति सर्वत्र वर्जयेत — हर चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है।
    वाक्य-प्रयोग: किसी भी चीज़ की अधिकता ठीक नहीं, अति सर्वत्र वर्जयेत।
  • अक्ल बड़ी या भैंस — ताकत से अधिक बुद्धि महत्वपूर्ण होती है।
    वाक्य-प्रयोग: उसने समझदारी से समस्या हल की, सच है अक्ल बड़ी या भैंस।
  • आम के आम गुठलियों के दाम — एक काम से दो लाभ होना।
    वाक्य-प्रयोग: बाजार जाकर सामान भी खरीद लिया और दोस्त से भी मिल लिया, आम के आम गुठलियों के दाम।
  • एक और एक ग्यारह — एकता में शक्ति होती है।
    वाक्य-प्रयोग: मिलकर काम करने से सफलता मिलती है, क्योंकि एक और एक ग्यारह होते हैं।
  • एक हाथ से ताली नहीं बजती — झगड़े में दोनों पक्षों की गलती होती है।
    वाक्य-प्रयोग: दोनों दोस्तों में झगड़ा हुआ है, सच है एक हाथ से ताली नहीं बजती।
  • ऊँची दुकान फीका पकवान — दिखावा अधिक पर गुणवत्ता कम।
    वाक्य-प्रयोग: उस होटल का नाम बड़ा है पर खाना अच्छा नहीं, ऊँची दुकान फीका पकवान।
  • एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है — एक बुरा व्यक्ति पूरे समूह को बदनाम करता है।
    वाक्य-प्रयोग: एक छात्र की गलती से पूरी कक्षा बदनाम हो गई।
  • घर का भेदी लंका ढाए — अपना ही व्यक्ति नुकसान पहुँचा देता है।
    वाक्य-प्रयोग: कंपनी का रहस्य बताने वाला कर्मचारी घर का भेदी निकला।
  • जैसा बोओगे वैसा काटोगे — कर्मों का फल वैसा ही मिलता है।
    वाक्य-प्रयोग: जो दूसरों के साथ बुरा करता है उसे याद रखना चाहिए कि जैसा बोओगे वैसा काटोगे।
  • जहाँ चाह वहाँ राह — दृढ़ इच्छा से रास्ता मिल जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: उसने कठिन परिस्थितियों में भी सफलता पाई क्योंकि जहाँ चाह वहाँ राह।
  • नाच न जाने आँगन टेढ़ा — अपनी कमी का दोष दूसरों पर डालना।
    वाक्य-प्रयोग: पढ़ाई नहीं करता और कहता है पेपर कठिन था, नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
  • नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली — बहुत गलत काम करने के बाद धार्मिक बनने का दिखावा।
    वाक्य-प्रयोग: इतने गलत काम करने के बाद वह धार्मिक बनने लगा।
  • देर आए दुरुस्त आए — देर से ही सही, पर सही काम होना अच्छा है।
    वाक्य-प्रयोग: उसने देर से पढ़ाई शुरू की लेकिन देर आए दुरुस्त आए।
  • बूँद-बूँद से सागर भरता है — छोटी-छोटी चीजें मिलकर बड़ा परिणाम देती हैं।
    वाक्य-प्रयोग: रोज थोड़ा-थोड़ा बचत करने से बड़ी रकम बन जाती है।
  • भागते भूत की लंगोटी भली — नुकसान में थोड़ा लाभ भी अच्छा।
    वाक्य-प्रयोग: सब पैसा डूब गया पर थोड़ा बच गया।
  • साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे — ऐसा उपाय जिससे किसी का नुकसान न हो।
    वाक्य-प्रयोग: हमें ऐसा समाधान चाहिए जिससे साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।
  • डूबते को तिनके का सहारा — मुसीबत में छोटी मदद भी बड़ी लगती है।
    वाक्य-प्रयोग: मुश्किल समय में दोस्त की मदद डूबते को तिनके का सहारा बनी।
  • चोर की दाढ़ी में तिनका — दोषी व्यक्ति स्वयं डर जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: चोरी की बात सुनकर वह घबरा गया।
  • जंगल में मोर नाचा किसने देखा — बिना लोगों के सामने किए काम का महत्व नहीं।
    वाक्य-प्रयोग: मेहनत के साथ उसे दिखाना भी जरूरी है।
  • लोहे को लोहा काटता है — ताकत का मुकाबला ताकत से।
    वाक्य-प्रयोग: कठिन समस्या का हल मजबूत योजना से ही होगा।
  • जाके पाँव न फटे बिवाई वो क्या जाने पीर पराई — जिसने दुख नहीं झेला वह दूसरों का दुख नहीं समझ सकता।
    वाक्य-प्रयोग: अमीर लोग गरीबों की समस्या नहीं समझते।
  • घर की मुर्गी दाल बराबर — घर की चीज़ का महत्व नहीं समझना।
    वाक्य-प्रयोग: अपने देश की चीज़ों को लोग कम महत्व देते हैं।
  • जिसकी लाठी उसकी भैंस — शक्तिशाली व्यक्ति का अधिकार चलता है।
    वाक्य-प्रयोग: गाँव में उसी की चलती है जिसके पास ताकत है।
  • जितनी चादर हो उतने पैर फैलाओ — अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करना चाहिए।
    वाक्य-प्रयोग: ज्यादा खर्च करने से पहले याद रखना चाहिए कि जितनी चादर हो उतने पैर फैलाओ।
  • दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है — एक बार ठगा गया व्यक्ति सावधान हो जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: धोखा खाने के बाद वह हर काम सोच-समझकर करता है।
  • दूर के ढोल सुहावने — दूर की चीज़ें अच्छी लगती हैं।
    वाक्य-प्रयोग: शहर का जीवन बाहर से अच्छा लगता है।
  • मन चंगा तो कठौती में गंगा — मन पवित्र हो तो हर जगह पवित्रता होती है।
    वाक्य-प्रयोग: सच्चा मन सबसे बड़ा तीर्थ है।
  • नाम बड़े और दर्शन छोटे — प्रसिद्धि अधिक लेकिन योग्यता कम।
    वाक्य-प्रयोग: उस स्कूल की बहुत तारीफ सुनी थी, लेकिन पढ़ाई अच्छी नहीं निकली, सच में नाम बड़े और दर्शन छोटे।
  • न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी — कारण समाप्त होने पर समस्या भी समाप्त हो जाती है।
    वाक्य-प्रयोग: झगड़े की जड़ को ही खत्म कर दिया गया, अब न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।
  • सौ सुनार की एक लोहार की — शक्तिशाली का एक वार ही काफी होता है।
    वाक्य-प्रयोग: उसने एक ही बार में समस्या हल कर दी, सच में सौ सुनार की एक लोहार की।
  • सावधानी हटी दुर्घटना घटी — सावधानी न रखने से दुर्घटना हो सकती है।
    वाक्य-प्रयोग: सड़क पार करते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि सावधानी हटी दुर्घटना घटी।
  • मन के हारे हार है मन के जीते जीत — आत्मविश्वास से सफलता मिलती है।
    वाक्य-प्रयोग: कठिन परिस्थिति में भी हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि मन के हारे हार है।
  • जैसी करनी वैसी भरनी — कर्म का फल अवश्य मिलता है।
    वाक्य-प्रयोग: जो दूसरों के साथ बुरा करता है उसे एक दिन उसका फल मिलता है।
  • थोथा चना बाजे घना — कम ज्ञान वाला अधिक दिखावा करता है।
    वाक्य-प्रयोग: वह थोड़ा पढ़कर ही बहुत घमंड करता है।
  • बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद — मूर्ख व्यक्ति अच्छी चीज़ का महत्व नहीं समझता।
    वाक्य-प्रयोग: उसे अच्छी किताबों की कद्र नहीं है।
  • चोर-चोर मौसेरे भाई — समान स्वभाव वाले लोग जल्दी मिल जाते हैं।
    वाक्य-प्रयोग: दोनों शरारती बच्चे जल्दी दोस्त बन गए।
  • लालच बुरी बला है — लालच बहुत नुकसान करता है।
    वाक्य-प्रयोग: ज्यादा पैसे के लालच में उसने अपना नुकसान कर लिया।
  • जिसकी लाठी उसकी भैंस — शक्तिशाली व्यक्ति का अधिकार चलता है।
    वाक्य-प्रयोग: गाँव में उसी की चलती है जिसके पास ताकत है।
  • घर की मुर्गी दाल बराबर — घर की चीज़ का महत्व नहीं समझना।
    वाक्य-प्रयोग: लोग अपने देश की चीजों को कम महत्व देते हैं।
  • जितनी चादर हो उतने पैर फैलाओ — अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करो।
    वाक्य-प्रयोग: फिजूल खर्ची नहीं करनी चाहिए।
  • दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है — एक बार धोखा खाने के बाद व्यक्ति सावधान हो जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: पिछली बार नुकसान हुआ था इसलिए अब वह सोच-समझकर काम करता है।
  • दूर के ढोल सुहावने — दूर की चीज़ें अच्छी लगती हैं।
    वाक्य-प्रयोग: शहर का जीवन दूर से अच्छा लगता है।
  • मन चंगा तो कठौती में गंगा — मन पवित्र हो तो हर जगह पवित्रता है।
    वाक्य-प्रयोग: सच्चा मन सबसे बड़ा तीर्थ होता है।
  • जाको राखे साइयां मार सके न कोय — जिसे भगवान बचाता है उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
    वाक्य-प्रयोग: बड़ी दुर्घटना में भी वह बच गया।
  • कर भला हो भला — अच्छे कर्म का फल अच्छा मिलता है।
    वाक्य-प्रयोग: हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए।
  • बंदर बाँट — बेईमानी से बाँटना।
    वाक्य-प्रयोग: दोनों के झगड़े में तीसरे ने फायदा उठा लिया।
  • जहाँ चार बर्तन होते हैं वहाँ खटपट होती है — साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक है।
    वाक्य-प्रयोग: परिवार में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं।
  • आ बैल मुझे मार — स्वयं मुसीबत मोल लेना।
    वाक्य-प्रयोग: बिना कारण झगड़े में पड़ना आ बैल मुझे मार जैसा है।
  • अंधा क्या चाहे दो आँखें — मनचाही चीज़ मिल जाना।
    वाक्य-प्रयोग: उसे नौकरी भी मिल गई और अच्छा वेतन भी, अंधा क्या चाहे दो आँखें।
  • अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता — अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता।
    वाक्य-प्रयोग: हमें मिलकर काम करना चाहिए क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।
  • आसमान से गिरे खजूर में अटके — एक मुसीबत से निकलकर दूसरी में फँसना।
    वाक्य-प्रयोग: नौकरी छोड़ी तो नई नौकरी भी नहीं मिली।
  • आगे कुआँ पीछे खाई — चारों तरफ से संकट होना।
    वाक्य-प्रयोग: वह ऐसी स्थिति में फँस गया कि आगे कुआँ पीछे खाई।
  • एक पंथ दो काज — एक काम से दो लाभ।
    वाक्य-प्रयोग: बाजार जाकर सामान भी ले आया और दोस्त से भी मिल आया।
  • ऊँट के मुँह में जीरा — आवश्यकता के अनुसार बहुत कम होना।
    वाक्य-प्रयोग: इतने बड़े परिवार के लिए यह खाना ऊँट के मुँह में जीरा है।
  • काला अक्षर भैंस बराबर — बिल्कुल अशिक्षित होना।
    वाक्य-प्रयोग: उसे पढ़ना-लिखना नहीं आता।
  • खाली बर्तन ज्यादा बजते हैं — मूर्ख व्यक्ति अधिक बोलता है।
    वाक्य-प्रयोग: जो कम जानते हैं वही ज्यादा शोर मचाते हैं।
  • खोदा पहाड़ निकली चुहिया — बहुत मेहनत के बाद बहुत छोटा परिणाम मिलना।
    वाक्य-प्रयोग: इतनी तैयारी के बाद भी छोटा कार्यक्रम हुआ।
  • गागर में सागर भरना — कम शब्दों में बड़ी बात कहना।
    वाक्य-प्रयोग: उसकी कविता गागर में सागर भरने जैसी है।
  • घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध — अपने व्यक्ति की कद्र नहीं करना।
    वाक्य-प्रयोग: अपने शिक्षक की बात नहीं मानते लेकिन बाहर वालों की मान लेते हैं।
  • चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए — बहुत कंजूस होना।
    वाक्य-प्रयोग: वह इतना कंजूस है कि खर्च नहीं करता।
  • चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात — थोड़े समय की खुशी।
    वाक्य-प्रयोग: उसकी सफलता ज्यादा दिन नहीं चली।
  • चोर की दाढ़ी में तिनका — दोषी व्यक्ति डर जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: चोरी की बात सुनकर वह घबरा गया।
  • जहाँ धुआँ होता है वहाँ आग भी होती है — अफवाह के पीछे कुछ सच्चाई होती है।
    वाक्य-प्रयोग: लोग कुछ कह रहे हैं तो कुछ न कुछ बात जरूर होगी।
  • जैसा देश वैसा भेष — स्थान के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।
    वाक्य-प्रयोग: विदेश में जाकर उसने वही पहनावा अपना लिया।
  • जंगल में मोर नाचा किसने देखा — बिना लोगों के सामने किए काम का महत्व नहीं।
    वाक्य-प्रयोग: मेहनत को लोगों तक पहुँचाना भी जरूरी है।
  • टेढ़ी खीर — बहुत कठिन काम।
    वाक्य-प्रयोग: यह समस्या हल करना टेढ़ी खीर है।
  • ढाक के तीन पात — कोई परिवर्तन न होना।
    वाक्य-प्रयोग: इतना समझाने के बाद भी वही हाल है।
  • थाली का बैंगन — जो स्थिर न हो।
    वाक्य-प्रयोग: वह हर बात में अपना पक्ष बदल लेता है।
  • दाल में कुछ काला है — कोई गड़बड़ होना।
    वाक्य-प्रयोग: उसकी बातों से लगता है दाल में कुछ काला है।
  • दूर के ढोल सुहावने — दूर की चीज अच्छी लगती है।
    वाक्य-प्रयोग: शहर का जीवन दूर से अच्छा लगता है।
  • न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी — कारण खत्म तो समस्या खत्म।
    वाक्य-प्रयोग: झगड़े की जड़ ही खत्म कर दी।
  • नौ दिन चले अढ़ाई कोस — बहुत धीमी गति से काम होना।
    वाक्य-प्रयोग: उसका काम बहुत धीरे चलता है।
  • पानी सिर से गुजरना — समस्या बहुत बढ़ जाना।
    वाक्य-प्रयोग: अब मामला पानी सिर से गुजर गया है।
  • बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद — मूर्ख व्यक्ति अच्छी चीज नहीं समझता।
    वाक्य-प्रयोग: उसे कला का महत्व नहीं पता।
  • बूँद-बूँद से सागर भरता है — छोटी-छोटी चीजों से बड़ा परिणाम।
    वाक्य-प्रयोग: रोज बचत करने से बड़ी रकम बनती है।
  • भागते भूत की लंगोटी भली — थोड़ा लाभ भी अच्छा।
    वाक्य-प्रयोग: सब पैसा डूब गया पर थोड़ा बच गया।
  • मन के हारे हार है मन के जीते जीत — आत्मविश्वास से सफलता मिलती है।
    वाक्य-प्रयोग: कठिन परिस्थिति में भी हार नहीं माननी चाहिए।
  • रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई — नुकसान के बाद भी घमंड न जाना।
    वाक्य-प्रयोग: हारने के बाद भी उसका घमंड कम नहीं हुआ।
  • लालच बुरी बला है — लालच नुकसान करता है।
    वाक्य-प्रयोग: ज्यादा लालच में उसने सब गँवा दिया।
  • साँप भी मर जाए लाठी भी न टूटे — ऐसा उपाय जिससे दोनों का नुकसान न हो।
    वाक्य-प्रयोग: हमें ऐसा समाधान चाहिए जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हों।
  • सावधानी हटी दुर्घटना घटी — असावधानी से दुर्घटना होती है।
    वाक्य-प्रयोग: सड़क पार करते समय ध्यान रखना चाहिए।
  • हाथ कंगन को आरसी क्या — स्पष्ट चीज को प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
    वाक्य-प्रयोग: उसका काम खुद उसकी योग्यता बताता है।
  • हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और — दिखावा अलग, वास्तविकता अलग।
    वाक्य-प्रयोग: नेता लोग अक्सर ऐसा करते हैं।
  • आम के आम गुठलियों के दाम — एक काम से दो लाभ।
    वाक्य-प्रयोग: पढ़ाई भी हो गई और ज्ञान भी बढ़ गया।
  • एक और एक ग्यारह — एकता में शक्ति है।
    वाक्य-प्रयोग: मिलकर काम करने से सफलता मिलती है।
  • चोर-चोर मौसेरे भाई — समान स्वभाव वाले जल्दी मिलते हैं।
    वाक्य-प्रयोग: दोनों शरारती लड़के जल्दी दोस्त बन गए।
  • जाको राखे साइयां मार सके न कोय — भगवान जिसकी रक्षा करे उसे कोई नुकसान नहीं।
    वाक्य-प्रयोग: बड़ी दुर्घटना में भी वह बच गया।
  • कर भला हो भला — अच्छे कर्म का फल अच्छा।
    वाक्य-प्रयोग: हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए।
  • बंदर बाँट — बेईमानी से बाँटना।
    वाक्य-प्रयोग: तीसरे व्यक्ति ने दोनों का फायदा उठा लिया।
  • जहाँ चार बर्तन होते हैं वहाँ खटपट होती है — साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक।
    वाक्य-प्रयोग: परिवार में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं।
  • दूध का दूध पानी का पानी — सच्चाई स्पष्ट हो जाना।
    वाक्य-प्रयोग: जाँच के बाद दूध का दूध पानी का पानी हो गया।
  • लोहे को लोहा काटता है — ताकत का मुकाबला ताकत से।
    वाक्य-प्रयोग: कठिन समस्या का हल मजबूत उपाय से होगा।
  • डूबते को तिनके का सहारा — संकट में छोटी मदद भी बड़ी लगती है।
    वाक्य-प्रयोग: मुश्किल समय में दोस्त की मदद मिली।
  • जाके पाँव न फटे बिवाई वो क्या जाने पीर पराई — जिसने दुख नहीं झेला वह नहीं समझता।
    वाक्य-प्रयोग: अमीर लोग गरीबों का दुख नहीं समझते।
  • सौ सुनार की एक लोहार की — शक्तिशाली का एक वार काफी।
    वाक्य-प्रयोग: उसने एक ही बार में समस्या हल कर दी।
  • नाम बड़े और दर्शन छोटे — प्रसिद्धि अधिक, योग्यता कम।
    वाक्य-प्रयोग: होटल का नाम बड़ा था पर खाना अच्छा नहीं।
  • जहाँ चाह वहाँ राह — दृढ़ इच्छा से रास्ता मिल जाता है।
    वाक्य-प्रयोग: उसने कठिन परिस्थिति में भी सफलता पाई।
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