प्रस्तावना
अशोक वाजपेयी समकालीन हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, संपादक और संस्कृतिकर्मी हैं। उन्होंने हिन्दी कविता को आधुनिक संवेदनाओं, मानवीय भावनाओं और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध किया है। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी भी रहे, लेकिन उनकी प्रसिद्धि एक साहित्यकार और कवि के रूप में अधिक है। उन्होंने साहित्य, कला और संस्कृति के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। भोपाल में प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र भारत भवन की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उनके काव्य संग्रह “कहीं नहीं वहीं” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1994) से सम्मानित किया गया।
जन्म और परिवार
अशोक वाजपेयी का जन्म 16 जनवरी 1941 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर में एक शिक्षित और सम्पन्न परिवार में हुआ। उनके पिता सागर विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार थे और उनके नाना डिप्टी कलेक्टर थे। परिवार में शिक्षा और संस्कृति का अच्छा वातावरण था, जिसके कारण बचपन से ही उनके मन में साहित्य और कला के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न हो गई।
शिक्षा
अशोक वाजपेयी की प्रारम्भिक शिक्षा लालगंज के सरकारी विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने सागर विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट और बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली गए और दिल्ली के प्रसिद्ध St. Stephen’s College से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने दिल्ली के Dayal Singh College में अध्यापन कार्य भी किया।
प्रशासनिक जीवन
अशोक वाजपेयी ने 1965 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन का अधिकांश समय मध्य प्रदेश में बिताया, विशेषकर भोपाल में। वहाँ उन्होंने राज्य के संस्कृति सचिव के रूप में भी कार्य किया।
अपने प्रशासनिक कार्यकाल के अंतिम समय में वे भारत सरकार के संस्कृति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर दिल्ली में कार्यरत रहे। प्रशासनिक पदों पर रहते हुए उन्होंने साहित्य, कला और संस्कृति के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना और संचालन में योगदान दिया।
सांस्कृतिक और संस्थागत योगदान
अशोक वाजपेयी केवल कवि ही नहीं बल्कि एक सक्रिय संस्कृतिकर्मी भी रहे हैं। उन्होंने भारत में कला और संस्कृति के प्रसार के लिए अनेक संस्थाओं की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख हैं —
- भारत भवन (भोपाल)
- मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद
- उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत अकादमी
- ध्रुपद केंद्र
- चक्रधर नृत्य केंद्र
- कालिदास अकादमी
- उर्दू अकादमी
इसके अतिरिक्त वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) के प्रथम उपकुलपति भी रहे। बाद में उन्होंने ललित कला अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
उनके प्रयासों से भोपाल में साहित्य और कला के हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे भारतीय संस्कृति को व्यापक पहचान मिली।
साहित्यिक जीवन
अशोक वाजपेयी का साहित्यिक जीवन बहुत कम उम्र में ही शुरू हो गया था। वे 16–17 वर्ष की आयु में ही प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ लिखने लगे थे। उनका पहला कविता संग्रह “शहर अब भी संभावना है” 1966 में प्रकाशित हुआ।
इसके बाद उनके अनेक काव्य संग्रह प्रकाशित हुए और वे समकालीन हिन्दी कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाने लगे। उनकी कविताओं में जीवन, प्रेम, समय, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है।
प्रमुख काव्य-संग्रह (रचनाएँ)
अशोक वाजपेयी के प्रमुख काव्य संग्रह निम्नलिखित हैं —
- शहर अब भी संभावना है (1966)
- एक पतंग अनंत में
- अगर इतने से
- तत्पुरुष
- कहीं नहीं वहीं
- बहुरि अकेला
- थोड़ी-सी जगह
- घास में दुबका आकाश
- आविन्यों
- जो नहीं है
- अभी कुछ और
- समय के पास समय
- कहीं कोई दरवाजा
- दुःख चिट्ठीरसा है
- पुनर्वसु
- विवक्षा
- कुछ रफू कुछ थिगड़े
- इस नक्षत्रहीन समय में
- कम से कम
- हार-जीत
आलोचना और निबंध कृतियाँ
अशोक वाजपेयी ने आलोचना और निबंध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी प्रमुख आलोचना और निबंध कृतियाँ इस प्रकार हैं —
- फिलहाल (1970)
- कुछ पूर्वग्रह
- समय से बाहर
- कविता का गल्प
- सीढ़ियाँ शुरू हो गई हैं
- कभी-कभार
इन रचनाओं में उन्होंने साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार प्रस्तुत किए हैं।
संपादित पुस्तकें
अशोक वाजपेयी ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। इनमें प्रमुख हैं —
- साहित्य विनोद
- कला विनोद
- प्रतिनिधि कविताएँ
- कवि ने कहा
- खुल गया है द्वार एक
- 75 कविताएँ
उन्होंने अनेक प्रसिद्ध विदेशी कवियों की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद भी किया है।
पुरस्कार और सम्मान
अशोक वाजपेयी को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उन्हें 1994 में उनके काव्य संग्रह “कहीं नहीं वहीं” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, कबीर सम्मान तथा फ्रांस और पोलैंड सरकार के सांस्कृतिक सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।
साहित्य में स्थान
अशोक वाजपेयी समकालीन हिन्दी साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। उन्होंने आधुनिक हिन्दी कविता को नई दिशा और नई संवेदनाएँ दीं। उनके साहित्य में आधुनिक जीवन की जटिलताओं, मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
