प्रस्तावना
जयप्रकाश भारती हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार, पत्रकार, संपादक और लेखक थे। उन्होंने बाल साहित्य, विज्ञान लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाओं में ज्ञान, मनोरंजन और शिक्षा का सुंदर समन्वय मिलता है। उन्होंने सरल और रोचक शैली में वैज्ञानिक तथा ऐतिहासिक विषयों को प्रस्तुत करके हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाया।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
जयप्रकाश भारती का जन्म 2 जनवरी 1936 को उत्तर प्रदेश के मेरठ नगर में एक प्रतिष्ठित मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रघुनाथ सहाय था, जो मेरठ के प्रसिद्ध वकील, पुराने कांग्रेसी और समाजसेवी व्यक्ति थे।
बाल्यकाल से ही भारती जी का झुकाव अध्ययन, समाज सेवा और साहित्य की ओर था। छात्र जीवन में ही वे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रहे। उन्होंने मेरठ में साक्षरता प्रसार के लिए कई वर्षों तक प्रौढ़ रात्रि-पाठशाला का नि:शुल्क संचालन किया।
शिक्षा
जयप्रकाश भारती ने मेरठ में अपनी प्रारंभिक तथा उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बी०एस-सी० की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके अतिरिक्त उन्होंने एम०ए० और साहित्यरत्न की परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण कीं।
उन्होंने पत्रकारिता तथा अन्य विषयों में डिप्लोमा भी किया। संपादन कला में दक्षता प्राप्त करने के लिए उन्होंने “संपादन कला-विशारद” की परीक्षा उत्तीर्ण की।
पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए उन्होंने मेरठ से प्रकाशित दैनिक “प्रभात” और दिल्ली से प्रकाशित नवभारत टाइम्स में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने लखनऊ के “साक्षरता निकेतन” में नवसाक्षर साहित्य लेखन का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
पत्रकारिता और संपादन कार्य
जयप्रकाश भारती का पत्रकारिता और संपादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे कई वर्षों तक दिल्ली से प्रकाशित प्रसिद्ध पत्रिका साप्ताहिक हिन्दुस्तान में सह-सम्पादक तथा विज्ञान संपादक रहे।
इसके बाद वे दिल्ली से प्रकाशित प्रसिद्ध बाल पत्रिका Nandan के संपादक बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बाल साहित्य के विकास और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साहित्यिक योगदान
जयप्रकाश भारती ने हिंदी साहित्य को विशेष रूप से बाल साहित्य के क्षेत्र में समृद्ध किया। उनकी एक हजार से अधिक कविताएँ, कहानियाँ और लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।
उन्होंने लगभग सौ से अधिक पुस्तकों का संपादन भी किया। उनकी रचनाओं में बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक, रोचक और प्रेरणादायक सामग्री मिलती है।
उन्होंने वैज्ञानिक विषयों को भी अत्यंत सरल और साहित्यिक शैली में प्रस्तुत किया, जिससे बच्चों और सामान्य पाठकों के लिए उन्हें समझना आसान हो गया।
प्रमुख रचनाएँ
जयप्रकाश भारती की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं —
मौलिक रचनाएँ
- अनन्त आकाश
- हिमालय की पुकार
- अथाह सागर
- विज्ञान की विभूतियाँ
- देश हमारा
- चलो चाँद पर चलें
- सरदार भगत सिंह
- हमारे गौरव के प्रतीक
- ऐसे थे हमारे बापू
- बर्फ की गुड़िया
- दुनिया रंग-बिरंगी
- अस्त्र-शस्त्र
- आदिम युग से अणु युग तक
- लोकमान्य तिलक
- संयुक्त राष्ट्र संघ
- भारत को संविधान
सम्पादित रचनाएँ
- भारत की प्रतिनिधि लोककथाएँ
- किरणमाला (तीन भागों में)
- हिंदी की सौ श्रेष्ठ पुस्तकें
- हिंदी पत्रकारिता : दशा और दिशा
- बाल पत्रकारिता : स्वर्ण युग की ओर
- हिंदी के श्रेष्ठ बालगीत
- एक थाल मोतियों भरा : जीवन निर्माण की प्रेरक कथाएँ
- भारतीय बाल साहित्य का इतिहास
भाषा-शैली
जयप्रकाश भारती की भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है। उन्होंने अपनी रचनाओं में आवश्यकतानुसार अंग्रेजी के पारिभाषिक शब्दों का भी प्रयोग किया है।
उनकी शैली अत्यंत प्रभावशाली और रोचक है। उनकी प्रमुख शैलियाँ हैं —
- भावात्मक शैली
- वर्णनात्मक शैली
- विवेचनात्मक शैली
- शब्द-चित्रात्मक शैली
इन शैलियों के माध्यम से उन्होंने अपने विचारों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
सम्मान और उपलब्धियाँ
जयप्रकाश भारती को श्रेष्ठ बाल साहित्य के लेखन के लिए भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा रजत पदक प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त उनकी कुछ रचनाएँ यूनेस्को तथा भारत सरकार द्वारा भी पुरस्कृत की गईं। इससे उनके साहित्यिक योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।
साहित्य में स्थान
जयप्रकाश भारती का हिंदी बाल साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने बाल साहित्य को रोचक, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बनाया।
उन्होंने वैज्ञानिक विषयों को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत करके हिंदी साहित्य में वैज्ञानिक लेखन की कमी को पूरा किया। इस प्रकार उन्होंने हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया।
निधन
जयप्रकाश भारती का निधन 5 फरवरी 2005 को हुआ। उनके निधन से हिंदी साहित्य, विशेषकर बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महान साहित्यकार का अंत हो गया।
