1. प्रस्तावना
जल जीवन का आधार है। पृथ्वी पर मनुष्य, पशु, पौधे और सभी जीव-जंतु जल पर ही निर्भर हैं। बिना जल के जीवन संभव नहीं है। प्राचीन काल में जल के स्रोत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे, लेकिन आज बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। नदियाँ सूख रही हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। ऐसी स्थिति में वर्षा जल संचयन का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है।
2. वर्षा जल संचयन का अर्थ
वर्षा जल संचयन का अर्थ है वर्षा के पानी को इकट्ठा करना और उसे भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना। वर्षा का जल छतों, आँगनों, सड़कों और खुले मैदानों पर गिरकर व्यर्थ बह जाता है। यदि इस पानी को टैंक, गड्ढों या कुओं में एकत्र किया जाए और जमीन के अंदर पहुँचाया जाए, तो इसे वर्षा जल संचयन कहा जाता है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है।
3. वर्षा जल संचयन की आवश्यकता
आज जल की माँग बहुत तेजी से बढ़ रही है। खेती, उद्योग और घरेलू कार्यों में पानी का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। भूजल का अधिक दोहन होने से जल स्तर नीचे चला गया है। कई क्षेत्रों में हैंडपंप और कुएँ सूख चुके हैं। यदि समय रहते वर्षा जल को संचित नहीं किया गया, तो भविष्य में पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं होगा। इसलिए वर्षा जल संचयन अत्यंत आवश्यक है।
4. वर्षा जल संचयन के लाभ
वर्षा जल संचयन के अनेक लाभ हैं। इससे भूजल स्तर बढ़ता है और पानी की कमी दूर होती है। इससे बाढ़ की समस्या कम होती है, क्योंकि पानी व्यर्थ बहने के बजाय संचित हो जाता है। यह पानी सिंचाई, सफाई और घरेलू कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। वर्षा जल संचयन से पर्यावरण संतुलन बना रहता है और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
5. वर्षा जल संचयन के तरीके
वर्षा जल संचयन के कई सरल तरीके हैं। घरों की छतों से पाइप द्वारा पानी को टंकी या गड्ढे में इकट्ठा किया जा सकता है। गाँवों में तालाब, पोखर और कुएँ बनाए जा सकते हैं। खेतों में छोटे बाँध और नालियाँ बनाकर पानी रोका जा सकता है। स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी भवनों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था होनी चाहिए।
6. सरकार और समाज की भूमिका
सरकार द्वारा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। नए भवनों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया जा रहा है। समाज को भी जागरूक होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए।
7. उपसंहार
अंत में कहा जा सकता है कि वर्षा जल संचयन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जल है तो जीवन है। यदि हम आज वर्षा के जल को संचित करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचा सकते हैं। इसलिए हमें जल की एक-एक बूँद को बचाने का संकल्प लेना चाहिए। सच ही कहा गया है—“जल है तो कल है।”
