दीपावली खुशियों, प्रकाश और उत्साह का पर्व है, लेकिन इसे मनाते समय पर्यावरण की सुरक्षा का ध्यान रखना भी प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। आधुनिक समय में अत्यधिक पटाखों, प्लास्टिक की सजावट और बिजली के अनावश्यक उपयोग के कारण वायु, ध्वनि तथा पर्यावरण प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। इसका दुष्प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों और प्रकृति पर भी पड़ता है। इसलिए हमें ऐसी दीपावली मनानी चाहिए, जो खुशियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे।
पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाने के लिए हमें मिट्टी के दीपकों का उपयोग करना चाहिए और बिजली की अत्यधिक रोशनी से बचना चाहिए। घर की सजावट के लिए प्राकृतिक फूलों, रंगोली और पुनः उपयोग की जा सकने वाली सजावटी सामग्री का प्रयोग करना चाहिए। प्लास्टिक और थर्मोकोल से बनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग कम से कम करना चाहिए, क्योंकि ये पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं।
पटाखों का प्रयोग न करना या बहुत कम करना सबसे अच्छा उपाय है। पटाखों से निकलने वाला धुआँ वायु को प्रदूषित करता है तथा तेज आवाज़ ध्वनि प्रदूषण फैलाती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, रोगियों और पशु-पक्षियों को काफी परेशानी होती है। इसलिए हमें शोर और प्रदूषण से दूर रहकर दीपावली मनानी चाहिए।
दीपावली के अवसर पर हमें अपने घर और आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कचरे का उचित निस्तारण करना चाहिए तथा दीपावली के बाद भी सफाई बनाए रखनी चाहिए। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों की सहायता करके, मिठाइयाँ और वस्त्र बाँटकर तथा पौधे लगाकर भी इस पर्व को सार्थक बनाया जा सकता है।
इस प्रकार यदि हम स्वच्छता, सादगी और पर्यावरण संरक्षण को अपनाकर दीपावली मनाएँ, तो यह पर्व हमारे जीवन में वास्तविक सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएगा। हरित (ग्रीन) दीपावली मनाना न केवल प्रकृति की रक्षा करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी सुनिश्चित करेगा।
