नंददुलारे वाजपेयी हिन्दी साहित्य के प्रमुख आलोचक, निबंधकार और साहित्य-इतिहासकार थे। वे आधुनिक हिन्दी आलोचना की उस परंपरा के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं, जिसमें तर्क, विवेक, ऐतिहासिक दृष्टि और साहित्यिक मूल्यांकन को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने हिन्दी साहित्य को भावुकता से ऊपर उठाकर बौद्धिक और वैचारिक आधार प्रदान किया।
जन्म
नंददुलारे वाजपेयी का जन्म 1906 ई. में उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका परिवार शिक्षित एवं सांस्कृतिक वातावरण वाला था। बचपन से ही उनमें अध्ययन, चिंतन और साहित्य के प्रति गहरी रुचि दिखाई देने लगी थी।
शिक्षा
उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा हिन्दी, संस्कृत और भारतीय साहित्य का गंभीर अध्ययन किया। उनकी शिक्षा ने उन्हें एक तर्कशील, विवेकपूर्ण और संतुलित आलोचक के रूप में विकसित किया। वे आचार्य रामचंद्र शुक्ल की आलोचना परंपरा से प्रभावित थे, किंतु उन्होंने अपनी स्वतंत्र आलोचनात्मक दृष्टि भी विकसित की।
साहित्यिक जीवन
नंददुलारे वाजपेयी का साहित्यिक जीवन मुख्य रूप से आलोचना और साहित्य-इतिहास लेखन से जुड़ा रहा। उन्होंने साहित्य को केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं माना, बल्कि उसे समाज, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी चेतना के रूप में देखा।
उनका मानना था कि—
साहित्य का मूल्यांकन उसके ऐतिहासिक संदर्भ, सामाजिक भूमिका और कलात्मक स्तर के आधार पर होना चाहिए।
इसी कारण उनकी आलोचना तथ्यपरक, संतुलित और वैज्ञानिक मानी जाती है।
प्रमुख कृतियाँ
नंददुलारे वाजपेयी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं—
आलोचना एवं साहित्य-इतिहास
- हिन्दी साहित्य : बीसवीं शताब्दी
- हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास
- आधुनिक हिन्दी साहित्य
इन कृतियों में उन्होंने आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास, प्रवृत्तियों और प्रमुख रचनाकारों का विवेकपूर्ण मूल्यांकन किया है।
भाषा
नंददुलारे वाजपेयी की भाषा—
- सरल
- स्पष्ट
- तर्कप्रधान
है। वे कठिन से कठिन विषयों को भी सहज और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करते हैं।
शैली
उनकी शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- विचारप्रधान शैली
- विश्लेषणात्मक शैली
- आलोचनात्मक शैली
उनकी शैली में न तो अनावश्यक भावुकता है और न ही दुरूहता।
विचारधारा
- साहित्य को सामाजिक चेतना से जोड़ना
- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से साहित्य का मूल्यांकन
- संतुलित और विवेकशील आलोचना
साहित्य में स्थान
नंददुलारे वाजपेयी हिन्दी साहित्य के उन आलोचकों में गिने जाते हैं जिन्होंने हिन्दी आलोचना को वैचारिक गंभीरता और ऐतिहासिक आधार प्रदान किया। उनका स्थान हिन्दी आलोचना परंपरा में अत्यंत सम्माननीय है।
निधन
नंददुलारे वाजपेयी का निधन 1967 ई. में हुआ।
