भीष्म साहनी हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकार, उपन्यासकार और अनुवादक थे। वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन से जुड़े रहे। उनके साहित्य में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना, सांप्रदायिकता का विरोध और आम आदमी का संघर्ष सशक्त रूप से अभिव्यक्त हुआ है। उन्हें विशेष रूप से ‘तमस’ जैसे यथार्थवादी उपन्यास के लिए जाना जाता है।
जन्म
भीष्म साहनी का जन्म 8 अगस्त 1915 ई. को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका बचपन और युवावस्था विभाजन-पूर्व भारत में बीती, जिसका गहरा प्रभाव उनके साहित्य पर पड़ा।
शिक्षा
भीष्म साहनी ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और साहित्य के साथ-साथ समाज और राजनीति का भी गहन अध्ययन किया। वे कुछ समय तक अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे।
साहित्यिक जीवन
भीष्म साहनी का साहित्यिक जीवन मानवता और सामाजिक चेतना से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने लेखन में भारत-पाक विभाजन की त्रासदी, सांप्रदायिक हिंसा और सामाजिक अन्याय का यथार्थ चित्रण किया। उनका लेखन सरल होते हुए भी गहरी संवेदना से भरपूर है।
प्रमुख कृतियाँ
🔹 उपन्यास
- तमस (सबसे प्रसिद्ध)
- मय्यादास की माड़ी
- कुंतो
🔹 कहानी-संग्रह
- भाग्यरेखा
- पाली
- अमृतसर आ गया है
🔹 नाटक
- कबिरा खड़ा बाज़ार में
भाषा
भीष्म साहनी की भाषा सरल, सहज और बोलचाल की खड़ी बोली हिन्दी है। उनकी भाषा में पंजाबी शब्दों का भी प्रभाव मिलता है।
शैली
उनकी शैली—
- यथार्थवादी
- संवेदनशील
- वर्णनात्मक
है। वे घटनाओं को मानवीय दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं।
विचारधारा
भीष्म साहनी मानवतावादी और प्रगतिशील लेखक थे। वे साहित्य को समाज-सुधार का माध्यम मानते थे।
सम्मान
भीष्म साहनी को उनके साहित्यिक योगदान के लिए—
- साहित्य अकादमी पुरस्कार
- पद्म भूषण
से सम्मानित किया गया।
निधन
भीष्म साहनी का निधन 11 जुलाई 2003 ई. को नई दिल्ली में हुआ।
